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मेजर शैतान सिंह, परम वीर चक्र (मरणोपरांत)
मेजर शैतान सिंह जम्मू कश्मीर के लद्दाख सेक्टर में लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई पर रेज़ांग ला में कुमाऊं रेजिमेंट की तेरहवीं बटालियन की एक कंपनी की कमान संभाले हुए थे। 18 नवंबर 1962 को बहुत बड़ी संख्या मे चीनी सैनिकों ने उनके ठिकाने पर जबरदस्त हमला किया। मेजर शैतान सिंह इस ऑपरेशन के दौरान पूरी तरह हावी रहे और इस विकट स्थिति में व्यक्तिगत खतरा उठाते हुए एक प्लाटून पोस्ट से दूसरे तक जाकर अपने सैनिकों का मनोबल बनाए रखा। गंभीर रूप से जख्मी होने के बावजूद वह अपने सैनिकों को प्रेरित करते हुए उनका नेतृत्व करते रहे। सैनिक भी अपने अफसर के बहादुरीपूर्ण उदाहरण का अनुकरण करते हुए वीरतापूर्वक लड़े और दुश्मनों को भारी क्षति पहुंचाई। जब उनके सैनिकों ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास किया तो उन्होंने मना कर दिया और अपनी अंतिम सांस तक उन्हें लड़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करते रहे। उनके इस उत्कृष्ट वीरता, प्रेरक नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया।  

 
MAJOR SHAITAN SINGH, PARAM VIR CHAKRA (POSTHUMOUS)
Major Shaitan Singh was commanding a company of 13 KUMAON at Rezang La in Jammu & Kashmir at a height of about 17,000 feet. On 18 November 1962, Chinese troops attacked his location with overwhelming strength. Major Shaitan Singh dominated the scene of operations and moved from one platoon post to another at great personal risk, sustaining the morale of his troops. Despite being grievously wounded he continued to encourage and lead his men, who, following his brave example fought gallantly and inflicted heavy casualties on the enemy. When his men tried to evacuate him, he refused and kept motivating them to keep fighting, till he breathed his last. For his conspicuous bravery, inspiring leadership and supreme sacrifice, he was awarded the Param Vir Chakra (Posthumous). 
  
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