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मेजर धन सिंह थापा, परम वीर चक्र
1/8 गोरखा राइफल्स के मेजर धन सिंह थापा लद्दाख में एक अग्रवर्ती चौकी की कमान संभाले हुए थे। 20 अक्तूबर 1962 को चीन के सैनिकों ने उनकी चौकी पर तोपों और मोर्टारों से बमबारी शुरु करने के बाद भारी सैन्यबल के साथ आक्रमण कर दिया। उनके नेतृत्व में, शत्रुओं की तुलना में बहुत कम संख्या में होते हुए भी भारतीय सैनिकों ने आक्रमण को नाकाम कर दिया और शत्रुओं को भारी क्षति पहुंचाई। शत्रु ने दूसरी बार आक्रमण किया और इस बार भी उनका हमला विफल रहा। चीनी सैनिकों ने तीसरी बार आक्रमण किया, इस बार उनकी इन्फैंट्री की सहायता के लिए टैंक भी थे। भारतीय सैनिकों की संख्या काफी कम रह गयी थी, फिर भी उन्होंने अंतिम क्षण तक मुकाबला किया। मेजर धन सिंह थापा ने चीनी सैनिकों द्वारा काबू में किए जाने से पूर्व आमने-सामने के मुकाबले में अनेक शत्रु सैनिकों को मार गिराया। मेजर थापा के अद्भुत साहस, अदम्य शौर्य तथा नेतृत्व सेना की उच्चतम परंपराओं के अनुरूप था जिसके लिए उन्हें परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। 

 
MAJOR DHAN SINGH THAPA, PARAM VIR CHAKRA
Major Dhan Singh Thapa of 1/8 GORKHA RIFLES was in command of a forward post in Ladakh. On 20 October 1962, his post was attacked by Chinese troops in overwhelming strength after intense artillery and mortar bombardment. Under his leadership, the greatly outnumbered post repulsed the attack, inflicting heavy casualties on them. The enemy attacked a second time and met a similar fate. The Chinese attacked for the third time, with infantry supported by tanks. Though considerably reduced in number, the post held out to the last. Major Dhan Singh Thapa killed several enemy soldiers in hand-to-hand combat before he was finally overpowered. Major Thapa's courage, conspicuous gallantry and leadership were in the highest traditions of the Army, for which he was awarded the Param Vir Chakra.