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लांस नायक करम सिंह, परम वीर चक्र
13 अक्तूबर 1948 को 1 सिख रेजीमेंट के लांस नायक करम सिंह जम्मू - कश्मीर की रिचमर गली में एक टुकड़ी की कमान संभाले हुए थे। दुश्मन ने बंदूकों और मोर्टारों से भारी गोलाबारी द्वारा हमला शुरु किया जिससे पोस्ट के सभी बंकर बर्बाद हो गए। बुरी तरह घायल और लहुलुहान होते हुए भी लांस नायक करम सिंह एक से दूसरे बंकर मे जाकर अपने साथियों की मदद करते रहे और उन्हें लड़ने के लिए प्रेरित करते रहे। दुश्मन ने उस दिन आठ बार आक्रमण किया। हर एक हमले के दौरान लांस नायक करम सिंह ने अपने साथियों को प्रोत्साहित किया और उनका जोश बढ़ाया। रीछमार गली को बचाने के लिए उनकी टुकड़ी ने दुश्मनों पर जवाबी हमला करते हुए गुत्थम-गुत्था की लड़ाई में अपने हथियार के बैनट से प्रहार किया। अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में उत्कृष्ट साहस और अदम्य शौर्य का प्रदर्शन करने के लिए लांस नायक करम सिंह को परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। 

 
LANCE NAIK KARAM SINGH, PARAM VIR CHAKRA
On 13 October 1948, Lance Naik Karam Singh of 1 SIKH was commanding a section at Richhmar Gali in Jammu & Kashmir. The enemy commenced its attack with heavy shelling of guns and mortars, which damaged all bunkers of the post. Despite being wounded and bleeding profusely, Lance Naik Karam Singh went from bunker to bunker, giving succour to his comrades and motivated them to fight. The enemy launched eight separate attacks that day. In each and every attack, Lance Naik Karam Singh encouraged and pepped up his buddies, while fighting the enemy. His section finally launched a counter attack and charged at the enemy with their bayonets to defend Richhmar Gali. For conspicuous courage and indomitable gallantry under extreme adverse circumstances, Lance Naik Karam Singh was awarded the Param Vir Chakra. 
  
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