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सेकंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे, परम वीर चक्र
08 अप्रैल 1948 को बॉम्बे सैपर्स के सेकंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे नौशेरा-राजौरी रोड के माइल 26 पर बारूदी सुरंगों और सड़क के अवरोधों को हटाने वाले दल की कमान संभाले हुए थे। दुश्मन ने उस क्षेत्र में भारी गोलाबारी शुरु कर दी जिसके कारण बारूदी सुरंग हटाने वाले दल के दो सदस्य वीरगति को प्राप्त हुए और पांच घायल हो गए । घायल होने के बावजूद सेकंड लेफ्टिनेंट राणे कुशलतापूर्वक एक विशालकाय स्टूअर्ट टैंक के नीचे गए और उसके साथ-साथ रेंगने लगे। वे टैंक के खतरनाक पहियों के अनुरूप रेंगते रहे और टैंक के ड्राइवर को एक रस्सी द्वारा संकेत देते हुए उसे बारूदी सुरंगों से सुरक्षित निकाल ले गए। इस तरह उन्होंने आगे बढ़ते भारतीय टैंकों को एक सुरक्षित रास्ता प्रदान किया। दुश्मनों के सामने अदम्य साहस और उच्च कोटि की वीरता प्रदर्शित करने के लिए सेकंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे को परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। 

 
SECOND LIEUTENANT RAMA RAGHOBA RANE, PARAM VIR CHAKRA
On 08 April 1948, Second Lieutenant Rama Raghoba Rane of Bombay Sappers, was in charge of the mine and roadblock clearing party at Mile 26 on Naushera-Rajouri road. The enemy started heavy shelling of the area, killing two and injuring five of the mine clearing party. Despite being wounded Second Lieutenant Rane crouched under a monstrous Stuart tank and began crawling with it. He synchronized himself with the movements of dangerous tank wheels and navigated the tank through the minefield and directed its movement by a rope tied to the tank driver, thus, securing a safe lane for the advancing Indian tanks. For displaying conspicuous bravery and gallantry of the highest order in the face of the enemy he was awarded the Param Vir Chakra.