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नायक जदुनाथ सिंह, परम वीर चक्र (मरणोपरांत)
पहली बटालियन राजपूत रेजीमेंट के नायक जदुनाथ सिंह जम्मू और कश्मीर में नौशेरा के नजदीक तैन धार में चौकी कमांडर थे। 06 फरवरी 1948 को शत्रु सेनाओं ने उनकी चौकी पर एक के बाद एक हमला करना शुरु कर दिया। वे और उनकी टुकड़ी शत्रु द्वारा लगातार किए गए तीन हमलों से अपनी चौकी को बचाने में कामयाब रहे। तीसरे हमले के अंत तक चौकी पर मौजूद 27 जवानों में से 24 जवान शहीद अथवा घायल हो चुके थे। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, एक स्टेन गन के साथ, उन्होंने अकेले ही शत्रुओं का सामना किया जिससे डर कर हमलावर भाग खड़े हुए। अदम्य साहस और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की बिल्कुल परवाह न करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए। इस उत्कृष्ट शौर्य और सर्वोच्च बलिदान के लिए नायक जदुनाथ सिंह को मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। 

 
NAIK JADUNATH SINGH, PARAM VIR CHAKRA (POSTHUMOUS)
Naik Jadunath Singh of 1 RAJPUT was a post commander at Tain Dhar near Naushera in Jammu & Kashmir. On 6 February 1948, enemy forces attacked his post in successive waves. He and his section were able to ward off three successive attacks by the enemy. By the end of third wave, of the 27 men at the post, 24 men were killed or severely wounded. Despite being grievously injured, armed with a Sten Gun, he single-handedly charged with such courage as to cause the attackers to withdraw. With raw courage and utter disregard to his personal safety, he attacked the enemy forces and met his gallant death during the charge. For this act of highest gallantry and supreme sacrifice he was awarded the Param Vir Chakra (Posthumous). 
  
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