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ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव, परम वीर चक्र
आपरेशन विजय के दौरान अठारहवीं ग्रेनेडियर्स के ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव घातक प्लाटून के सदस्य थे जिसे जम्मू कश्मीर के द्रास में टाइगर हिल टॉप पर कब्जा करने का काम सौंपा गया था। 03 जुलाई 1999 को दुश्मन की भारी गोलाबारी के बीच अपनी टीम के साथ उन्होंने बर्फीली खड़ी चट्टान पर चढ़ाई की और वहां स्थित बंकर को ध्वस्त कर दिया जिससे प्लाटून उस खड़ी चट्टान पर चढ़ने में कामयाब हो गई। पेट के निचले हिस्से और कंधे में तीन गोलियां लगने के बावजूद अतुलनीय ताकत का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने दूसरे बंकर पर हमला कर उसे भी ध्वस्त कर दिया और तीन पाकिस्तानी सैनिकों को मार डाला। उनके शौर्यपूर्ण कारनामे से प्रेरित होकर प्लाटून को नया साहस मिला तथा उसने अन्य ठिकानों पर हमला कर दिया और अंततः टाइगर हिल टॉप पर वापस कब्जा कर लिया। अदम्य साहस और सर्वोच्च कोटि के शौर्य का प्रदर्शन करने के लिए ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव को परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। 

 
GRENADIER YOGENDER SINGH YADAV, PARAM VIR CHAKRA
During Operation Vijay, Grenadier Yogender Singh Yadav of 18 GRENADIERS was part of the Ghatak Platoon tasked to capture Tiger Hill Top in Drass, Jammu & Kashmir. On 03 July 1999, under heavy enemy fire, he and his team scaled a snowbound vertical cliff face and silenced the bunker to allow the rest of Platoon to scale the cliff. Inspite of having been hit by three bullets in his groin and shoulder, displaying superhuman strength, he charged on to the second bunker and neutralised it, killing three Pakistani soldiers. Inspired by his gallant act, the platoon charged onto the other positions with renewed courage and captured Tiger Hill Top. For exhibiting an act of indomitable courage and gallantry of the highest order, he was awarded the Param Vir Chakra.