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लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, परम वीर चक्र (मरणोपरांत)
आपरेशन विजय के दौरान 11 गोरखा राइफल्स की पहली बटालियन के लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे को जम्मू कश्मीर के बटालिक में खालूबार रिज को दुश्मनों से खाली कराने का काम सौंपा गया। 03 जुलाई 1999 को उनकी कंपनी जैसै ही आगे बढ़ी दुश्मन ने उन पर भारी गोलाबारी शुरु कर दी। उन्होंने निडरतापूर्वक दुश्मन पर आक्रमण कर चार सैनिकों को मार डाला और दो बंकर तबाह कर दिए। कंधे और पैरों में जख्म होने के बावजूद वे पहले बंकर के निकट पहुंचे और भीषण मुठभेड़ में दो अन्य सैनिकों को मारकर बंकर खाली करा दिया। मस्तक पर प्राणघातक जख्म लगने से पहले एक के बाद एक बंकर पर कब्ज़ा करने मे वे अपने दल का नेतृत्व करते रहे। उनके अदम्य साहस से प्रोत्साहित होकर उनके सैनिकों ने दुश्मन पर हमला जारी रखा और अंततः पोस्ट पर कब्जा कर लिया। अत्यंत उत्कृष्ट शौर्यपूर्ण कारनामे का प्रदर्शन और सर्वोच्च बलिदान करने के लिए लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे को मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। 

 
LIEUTENANT MANOJ KUMAR PANDEY, PARAM VIR CHAKRA (POSTHUMOUS)
During Operation Vijay, Lieutenant Manoj Kumar Pandey of 1/11 GORKHA RIFLES was tasked to clear Khalubar Ridge in Batalik, Jammu & Kashmir. On 03 July 1999 as his company was advancing, it came under heavy enemy fire. He fearlessly assaulted the enemy, killing four enemy troops and destroying two bunkers. Although wounded in the shoulder and leg, he closed in on the first bunker and in a ferocious hand-to-hand combat, killed two more and cleared the bunker. He continued to lead his men clearing bunker after bunker, until he got a fatal burst on his forehead. Inspired by his raw courage, his troops kept charging at the enemy and ultimately captured the post. For exhibiting an act of most conspicuous gallantry and supreme sacrifice, he was awarded the Param Vir Chakra (Posthumous).