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मेजर होशियार सिंह, परम वीर चक्र
15 दिसंबर 1971 को भारत-पाक युद्ध के दौरान मेजर होशियार सिंह तीसरी ग्रेनेडियर्स की एक कंपनी की कमान संभाले हुए थे और उन्हें जरपाल में दुश्मन के एक ठिकाने पर कब्जा करने का आदेश मिला। हमले के दौरान उनकी कंपनी पर भीषण गोलाबारी हुई। उन्होंने निडरता से हमले का नेतृत्व किया और एक भयानक मुठभेड़ के बाद लक्षित ठिकाने पर कब्जा कर लिया। दुश्मन ने जवाबी कार्रवाई मे एक के बाद एक कई आक्रमण किए। घायल होने के बावजूद वे एक मोर्चे से दूसरे मोर्चे तक कार्रवाई करते हुए अपने सैनिकों को प्रेरित करते रहे और दुश्मनों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया। तभी दुश्मन का एक गोला, मध्यम मशीन गन वाली पोस्ट के पास आकर फटा जिससे वहां के सैनिक जख्मी हो गए और मशीन गन निष्क्रिय हो गई। मशीन गन के महत्व को समझते हुए मेजर होशियार सिंह तुरंत वहां पहुंचे और उसे स्वयं संचालित कर दुश्मन को गंभीर क्षति पहुंचाई। हमले का मुह तोड़ जवाब दिया गया और दुश्मन वहां से भाग खड़े हुए । उनके निर्भीक नेतृत्व और अदम्य युद्ध की क्षमता के लिए मेजर होशियार सिंह को परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। 

 
MAJOR HOSHIAR SINGH, PARAM VIR CHAKRA
On 15 December 1971, during India-Pakistan War Major Hoshiar Singh was commanding a company of 3 GRENADIERS and was ordered to capture the enemy locality of Jarpal. During the assault, his company came under intense shelling. Undeterred, he led the charge and captured the objective after a fierce hand-to-hand fight. The enemy reacted and put in several counter attacks. Despite being wounded he moved from trench to trench motivating his soldiers to shoot every enemy in sight. At that time, an enemy shell landed near the Medium Machine Gun post, injuring the crew and rendering it inoperative. Major Hoshiar Singh, realizing its importance, rushed and manned the gun, inflicting heavy casualties on the enemy. The attack was successfully repulsed and the enemy retreated. For his dauntless leadership and indomitable fighting spirit, he was awarded the Param Vir Chakra.