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फ्लाइंग अफसर निर्मल जीत सिंह सेखों, परम वीर चक्र (मरणोपरांत)
14 दिसंबर 1971 को भारत-पाक युद्ध के दौरान दुश्मन के छह सेबर वायुयानों ने श्रीनगर एअरफील्ड पर भारी गोलाबारी की। आक्रमण के दौरान उड़ान भरने के प्रयास में अपनी जान जोखिम मे डाल कर अठारहवीं स्क्वाड्रन के फ्लाइंग अफसर निर्मल जीत सिंह सेखों, जो एक लड़ाकू विमान पायलट थे, ने उड़ान भरी और दो आक्रमणकारी सेबर लड़ाकू जहाजों से भिड़ गए। उन्होंने एक विमान पर अविश्वसनीय कुशलता दिखाते हुए प्रहार किया और दूसरे विमान को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस समय तक पाक वायुसेना के चार सेबर विमान अपने साथियों के बचाव में आ गए। इस हवाई लड़ाई के दौरान उनके वायुयान को एक सेबर ने मार गिराया और वे वीरगति को प्राप्त हुए। निश्चित मृत्यु की स्थिति में फ्लाइंग अफसर सेखों द्वारा प्रदर्शित असाधारण वीरता, सर्वोच्च शौर्य और दृढ़ निश्चय ने वायुसेना की परंपराओं को एक नई ऊंचाई दी जिसके लिए फ्लाइंग अफसर निर्मल जीत सिंह सेखों को मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। 

 
FLYING OFFICER NIRMAL JIT SINGH SEKHON, PARAM VIR CHAKRA (POSTHUMOUS)
On 14 December 1971, Srinagar airfield was bombed and strafed by six Pakistani Sabre aircraft. Inspite of immense risk to life for attempting to take off during the air attack, Flying Officer Nirmal Jit Singh Sekhon of 18 Squadron, who was a Gnat pilot, took off and immediately engaged a pair of the attacking Sabres. He secured hits on one aircraft and damaged another. By this time four more Pak Sabre aircraft came to the rescue of their aircraft, which was locked in an air-combat with Indian Gnat. In the ensuing combat his aircraft was shot down by one of the Sabres. The sublime heroism, supreme gallantry and determination displayed by Flying Officer Sekhon in the face of certain death set new heights in Air Force traditions, for which he was awarded the Param Vir Chakra (Posthumous).