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लेफ्टिनेंट कर्नल ए बी तारापोर, परम वीर चक्र (मरणोपरांत)
लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशीर बुरज़ोरजी तारापोर 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान स्यालकोट सेक्टर में पूना हॉर्स रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर थे। 11 सितंबर 1965 को 17 पूना हॉर्स पर शत्रु के बख्तरबंद टैंको द्वारा भारी जवाबी हमला किया गया। रेजिमेंट ने शत्रु के हमले को नाकाम कर दिया और अपनी जगह डटे रहकर वीरतापूर्वक फिल्लौरा पर आक्रमण कर दिया। घायल होने के बावजूद लेफ्टिनेंट कर्नल तारापोर ने सुरक्षित स्थान पर ले जाए जाने से मना कर दिया और वजीरवाली, जसोरन तथा बुतुर-डोगरांडी पर कब्जा करने में अपनी रेजिमेंट का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व से प्रेरित होकर पूना हॉर्स ने 60 पाकिस्तानी टैंकों को ध्वस्त कर दिया। इस लड़ाई के दौरान, लेफ्टिनेंट कर्नल तारापोर के टैंक पर एक गोला आकर टकराया जिससे टैंक में आग लग गई और वे शूरवीर की तरह वीरगति को प्राप्त हुए। उनके द्वारा छः दिनों तक प्रदर्शित वीरता भारतीय सेना की उच्चतम परंपराओं के अनुकूल थी जिसके लिए लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशीर बुरज़ोरजी तारापोर को मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। 

 
LIEUTENANT COLONEL AB TARAPORE, PARAM VIR CHAKRA (POSTHUMOUS)
Lieutenant Colonel Ardeshir Burzorji Tarapore was the Commanding Officer of POONA HORSE Regiment in Sialkot sector during 1965 War. On 11 September 1965, Lieutenant Colonel Tarapore's Regiment was counter attacked by the enemy's heavy armour. The Regiment defied enemy's charge, held its ground and gallantly attacked Phillora. Despite being wounded, Lieutenant Colonel Tarapore refused to be evacuated and led his Regiment to capture Wazirwali, Jassoran and Butur-Dograndi. Inspired by his leadership, POONA HORSE destroyed 60 Pakistan tanks. However, Lieutenant Colonel Tarapore's tank was hit by a shell, enveloped in flames and he died a hero's death. The valour displayed by him for six days, was in keeping with the highest traditions of the Indian Army, for which he was awarded the Param Vir Chakra (Posthumous).