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तिथवाल की लड़ाई

भारत-पाकिस्तान युद्ध 1947-48 के दौरान जम्मू-कश्मीर स्थित तिथवाल क्षेत्र में लम्बे समय तक एक भीषण लड़ाई लड़ी गई। युद्ध के आरम्भिक दौर में पाकिस्तान समर्थित कबाइलियों ने सीमा पार कर सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तिथवाल पर कब्ज़ा कर लिया। इस क्षेत्र पर अधिकार के लिए तत्पश्चात भारत तथा पाकिस्तान की सेनाओं के बीच काफ़ी संघर्ष चला। पाकिस्तानी आक्रमणकारियों का मुख्य उद्देश्य तिथवाल क्षेत्र में भारतीय सेना के कब्ज़े में स्थित रीछमार गली तथा नस्ताचुन दर्रे पर आधिपत्य जमाना था। 13 अक्तूबर 1948 को पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के कब्ज़े में इन पोस्टों पर पुनः ज़ोरदार हमला बोला। भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस एवं वीरता का परिचय देते हुए, दुश्मन के प्रयासों को विफल कर बड़ी संख्या में उनके सैनिकों को हताहत कर दिया। भारतीय सैनिकों ने दृढ़निश्चय तथा इच्छाशक्ति का प्रदर्शन कर तिथवाल की पोस्टों पर अपना कब्ज़ा बनाए रखा। इस भित्ति चित्र में 6 राजपूताना राईफल्स के सैनिक, शत्रु के साथ आमने-सामने की लड़ाई करते देखे जा सकते हैं। 

 

BATTLE OF TITHWAL

The Battle of Tithwal was one of the fiercest and longest battles fought during India - Pakistan conflict in 1947-48. During initial stages, Pashtun tribal militia had crossed the border and occupied strategically important village of Tithwal on Indian side which was fought over and claimed by both sides on a number of occasions. Attacker's primary aim was to capture the Richhmar Gali located South of Tithwal and Nastachun Pass, East of Tithwal which was held by Indian Army. A massive attack was launched by Pakistan Army on 13 October 1948 hoping to capture the posts held by Indian troops but failed miserably with heavy casualties due to undaunting courage and valour displayed by Indian troops. The indomitable spirit and determination of Indian Army helped India in retaining the post of Tithwal. Soldiers of 6 RAJ RIF, Indian Army can be seen charging on the enemy in a hand to hand combat.