राष्ट्रीय समर स्मारक: इतिहास में एक झलक



1. इंडिया गेट    प्रथम विश्व युद्ध तथा तृतीय आंग्ल-अफगान युद्ध में शहीद हुए भारतीयों की याद में, वर्ष 1931 में दिल्ली में प्रतिष्ठित इंडिया गेट का निर्माण करवाया गया था। लगभग 83,000 शहीद भारतीयों में से 13,516 के नाम इंडिया गेट के चारों तरफ उत्कीर्ण हैं। नई दिल्ली आने वाले सभी पर्यटक इस स्मारक का भ्रमण अवश्य ही करते हैं।

2. अमर जवान ज्योति     1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारत की जीत के उपलक्ष्य में तथा अपने प्राणों का बलिदान करने वाले हमारे वीर सैनिकों के प्रति, राष्ट्र की श्रद्धांजलि के तौर पर जनवरी 1972 में इंडिया गेट की मेहराब के नीचे,अमर जवान ज्योति के साथ उल्टी राइफल पर हेलमेट स्थापित किया गया। तब से यथोचित अवसरों पर, अमर जवान ज्योति पर देशी-विदेशी गणमान्य व्यक्तियों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की जाती है।

3. आजादी के बाद के युद्धों में सशस्त्र सेनाओं की शहादतें    भारत की आजादी के बाद, भारतीय सशस्त्र सेनाओं को कई संघर्षों से जूझना पड़ा है और उन्होंने देश तथा विदेशों में कई ऑपरेशनों में भाग लिया है। सीमा पार से थोपे जा रहे छद्म युद्ध के कारण हमारा देश निरंतर आतंकवाद-रोधी ऑपरेशनों से जूझ रहा है जिनमें कर्तव्य पालन के दौरान बड़ी संख्या में हमारे सैनिक शहीद होते हैं। इन बलिदानों की याद में देश भर में कुछ स्मारक बनाए गए हैं लेकिन सशस्त्र सेनाओं के पुरूष और महिला सैनिकों के बलिदानों को समर्पित राष्ट्रीय स्तर पर कोई स्मारक अब तक मौजूद नहीं था। इस प्रकार राष्ट्रीय स्तर पर एक स्मारक की आवश्यकता महसूस की गई।

4. उत्पत्ति    राष्ट्रीय समर स्मारक के निर्माण की आवश्यकता वर्ष 1961 से विचाराधीन थी। गहन विचार-विमर्श के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 07 अक्तूबर 2015 को इसके निर्माण को अनुमोदन प्रदान किया। नई दिल्ली में 'सी' हेक्सागन पर इंडिया गेट के पूर्व में स्थित छतरी के आस-पास के क्षेत्र को स्मारक निर्माण के लिए उपयुक्त पाया गया।

5. निर्माण की प्रक्रिया    स्मारक के लिए डिजाइन का चयन करने के लिए 2016-17 में एक वैश्विक प्रतियोगिता आयोजित की गई। वेबे डिजाइन लैब, (WeBe design Lab) चेन्नई के श्री योगेश चंद्रहासन इस वैश्विक प्रतियोगिता के विजेता बने और उन्हें परियोजना सलाहकार नियुक्त किया गया। सांविधिक प्राधिकरणों से आवश्यक स्वीकृति प्राप्त की गईं। एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई और मैसर्स एनसीसी लि. को संविदा सौंपी गई। रक्षा मंत्रालय की ओर से एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय (आई डी एस मुख्यालय) ने परियोजना को क्रियान्वित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 फरवरी 2019 को यह स्मारक राष्ट्र की ओर से सशस्त्र सेनाओं को समर्पित किया गया। 
 

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Param Yodha Sthal  

 

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Eternal Soldier on Vigil 

 

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Smarika 

 

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Dedication Ceremony 

 

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Amar Chakra